स्वच्छता की एक पहल

हरदोई जिले में एच्. सी. एल (HCL) फाउंडेशन की समुदाय परियोजना में विभिन्न पहलुओं पर कार्य चलता रहा है, सामाजिक परिवर्तन आसान काम नहीं परन्तु परिवर्तन होता रहे यह जरूरी है हम सभी उसी के लिए प्रयासरत हैं | वह परिवर्तन चाहे नीतियों में हो या उनको क्रियान्वित करने के तरीकों में, एक अच्छे परिवर्तन के लिए जो भी संभव हो वह किया जाना चाहिए |

हमने पिछले एक साल से समुदाय को सुरक्षित करने हेतु, शक्तिशाली करने हेतु कार्यरत हैं, विभिन्न लोगों को इसी कड़ी में बदलाव के मुहाने तक पहुंचाने का कार्य किया है | लोगों को स्वस्थ और सुरक्षित करने हेतु ‘समुदाय’ की स्वच्छता एवं जल परियोजना के अंतर्गत गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने की मुहिम छेड़ी गयी, जिसके अंतर्गत 6 ग्राम पंचायतों को दो चरणों के अंतर्गत अपने कार्य-क्षेत्र में लिया गया | समुदाय संचालित सम्पूर्ण स्वच्छता (CLTS) विधि से स्वच्छता संग्राम छेड़ा गया और गाँव के लोगों द्वारा इसमें अग्रणी भूमिका निभाई गयी | गाँव के नेतृत्व को सहारा देना का काम किया गया और विधि की कार्यशाला से प्रशिक्षित लोगों ने स्वच्छता की मुहिम को आगे बढाया, जिसमें ग्राम पंचायत बालामऊ, पुरवा और निर्मलपुर को जहाँ पहले हिस्से में लिया गया दूसरे हिस्से में बांड, मेढ्हुआ और मेरुअरा के लिए अभियान चलाया गया |

निर्मलपुर भी पहले हिस्से की पंचायतों में से एक है, गाँव में समझ- बूझ की कमी न थी और युद्ध स्तर पर लोगों ने कार्य शुरू किया, गाँव के लोग प्रण ले चुके थी की मनुष्य के मल से मनुष्य के मुख तक पहुँचाने का रास्ता बंद किया जाए, पर किन्हीं कारण वश रफ्तार धीमी पड़ती गयी, और लोगों ने अपने शौचालय निर्माण के बाद अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण समझा, एक समुदाय का लक्ष्य एक पारिवारिक लक्ष्य में बदल गया | कार्यक्रम को मुख्य रूप से बिगाड़ने में सहयोग रहा सरकारी योजनाओं का, जिसमें मिलने वाली 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की वजह से अच्छे-अच्छे लोगों के मुंह में पानी आया, और लोगों ने निर्णय किया की सरकारी राशि के भुगतान के बाद ही शौचालय बनायेंगे | सरकार द्वारा पहले चरण में लोगों को शौचालय बनवाने पर प्रोत्साहन राशि दी गयी पर इन लोगों की संख्या बहुत कम थी, जिससे वंचित लोगों ने स्वच्छता अभियान से अपना मुंह मोड़ लिया | कार्यक्रम की असफलता का अन्य कारण रहा सरकारी अधिकारियों का व्यवहार, जो गाँव में जाकर ऊलजलूल आश्वासन देते रहे, जिनके न पूरा होने पर गाँव में निराशा की लहर छा गयी, और इसका सबसे बुरा असर पड़ा निगरानी समिति के लोगों पर जो की ग्राम वासियों को प्रेरित करने का कार्य किया करते थे | स्वच्छता कार्यक्रम में मुख्य रूप से देखने की बात यह रही की जिस शौचालय को एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी माना जाना चाहिए, उसे सरकारी जिम्मेदारी माना गया, हालत इस कदर ख़राब है की जिन लोगों को सरकारी योजना के तहत आवास बनाने का धन मिला हैं वह लोग भी शौचालय बनाने के इच्छुक नहीं हैं और सोचते हैं की इसके लिए धनराशि अलग से दी जाएगी जबकि आवास के लिए मिली धनराशि में शौचालय भी बनाना जरूरी है, प्रधान और पंचायत सचिव लोगों से अपना हिस्सा लेकर धनराशि लाभार्थियों को दे देते हैं |

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इन सब अवरोधो को दूर करने का जिम्मा परियोजना के लोगों ने उठाया, और विभिन्न तरीकों से लोगों के व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया गया | समुदाय परियोजना का महत्वपूर्ण अंग हमारे समुदाय मित्रों भी गाँव की तरक्की के लिए हर संभव प्रयास करते रहे, इन्हीं सब प्रयासों से निकला नुक्ता था रात्रि में समुदाय के साथ की जाने वाली बैठक, जिसमें चलचित्र के माध्यम से समुदाय को संबोधित किया जा सके, और स्वच्छता के महत्व को और रोचक बनाकर समाज के मध्य प्रस्तुत किया जा सके | अपने कार्य-क्षेत्र के अन्य हिस्सों में इस तरह का प्रयोग सफल रहा, निर्मलपुर में भी लोगों की उम्मीद से बढ़कर प्रक्रिया रही |

कार्यक्रम को सफल बनाने में भूमिका थी हमारे ग्राम नायक सुचित, आशीष, राकेश और चन्दन की, उनके सहयोग के लिए संजय शुक्ला, सौरव कुमार, आकृति और मैं (स्वतंत्र) उपस्थित रहे | कार्यक्रम की शुरुआत चलचित्र के माध्यम से हुई, जिससे हुआ यह की लोगों की रुचि उत्पन्न हुई, और संचार के माध्यम के अभाव में रहने वाले परिवारों को उनसे जोड़ने में आसानी हुई | बच्चों का उत्साह बखूबी दिख रहा था, घर से काम काज कर आई महिलाएं भी अपनी थकान उतारने की साथ-साथ अपनी जिज्ञासा भी दूर कर गयी, संजय शुक्ला जी द्वारा चल-चित्र को बीच-बीच में रोक कर समुदाय से लोगों से उनके प्रश्न पूछे या उनसे उनके प्रश्नों को पूछने के लिए कहा, लोगों में सबसे ज्यादा विरोध उठा पैसे से जुडी हुई बातों को लेकर | पासी मोहल्ले में बने सरकारी विद्यालय के प्रांगण में लोग अच्छी संख्या में मौजूद रहे, सबसे अच्छी बात यह रही की कार्यक्रम में लोगों ने वार्तालाप को दोनों और से सुचारु रूप से चलने दिया, कार्यक्रम के उपरांत एक सूक्ष्म चर्चा भी हुई उन सभी से, और खुले में शौच मुक्त गाँव के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कैसे किया जाए इस पर भी विचार हुआ | कार्यक्रम में सबसे अहम सवाल था उन अवरोधो को चिह्नित करना जिनकी वजह से खुले में शौच मुक्त गाँव के कार्यक्रम की रफ्तार कम हुई |

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कार्यक्रम के बाद लोगों को समझाया गया की एच्.सी.एल फाउंडेशन द्वारा चलाया जा रहा कार्यक्रम पूर्ण रूप से व्यवहार परिवर्तन पर चलाया जा रहा है और फाउंडेशन की किसी भी प्रकार से आर्थिक सहयोग देने में हिस्सेदारी नहीं है, और लोगों को बताया गया की समुदाय संचालित सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान मुख्य रूप से व्यवहार परिवर्तन पर काम करता है |

आशा है की ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किये जाते रहे, और खुले में शौच मुक्त गाँव और भारत का सपना पूर्ण हो सके |

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